

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया बहुउद्देशीय महाकालपुरम प्रकल्प का भूमिपूजन, आदर्श विद्यालयों को नई पीढ़ी के संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया
उज्जैन | SDNA
मध्यप्रदेश में शिक्षा और संस्कार आधारित विद्यालय व्यवस्था को विस्तार देने की दिशा में उज्जैन में एक नए प्रकल्प की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के जियापुरा में विद्या भारती की मानव बाल कल्याण समिति द्वारा निर्मित किए जाने वाले बहुउद्देशीय महाकालपुरम प्रकल्प का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने पहले से स्वीकृत 75 लाख रुपये के अतिरिक्त 1.25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श विद्यालय नई पीढ़ी को संस्कारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, विद्यालय ऐसे स्थान हैं जहां विद्यार्थियों को समान अवसर के साथ शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने गुरु सांदीपनि की परंपरा का उल्लेख करते हुए उज्जैन की शैक्षणिक विरासत को भी रेखांकित किया।
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सीबीएसई पद्धति से शिक्षा देने की योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में पहले से दो सरस्वती शिशु मंदिर मध्यप्रदेश बोर्ड के अंतर्गत संचालित हैं। प्रस्तावित महाकालपुरम प्रकल्प में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना है। इस पहल को क्षेत्र में शिक्षा के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया ने विद्या भारती की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, अच्छे आचरण, संस्कार और नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने अपने सरस्वती शिशु मंदिर में अध्ययन के अनुभव भी साझा किए।
इस अवसर पर विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अखिलेश मिश्रा, संत श्याम गिरी महाराज, महापौर मुकेश टटवाल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल तथा मानव बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
दशहरे पर प्रदेशभर में होंगे शस्त्र-पूजन कार्यक्रम
भोपाल/इंदौर | SDNA
विजयादशमी के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। शासन की घोषणा के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 अक्टूबर को इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे, जबकि अलग-अलग जिलों में मंत्रिपरिषद के सदस्य निर्धारित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
राज्य शासन ने शस्त्र-पूजन को शक्ति, साहस, आत्मरक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति सम्मान से जुड़ी परंपरा बताया है। सरकारी वक्तव्य के अनुसार, यह आयोजन अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा शक्ति का सदुपयोग करने के संकल्प का भी प्रतीक है। परंपरागत मान्यता में भगवान श्रीराम द्वारा रावण-वध से पहले अस्त्र-शस्त्रों की पूजा का उल्लेख किया जाता है।
किस जिले में कौन करेगा शस्त्र-पूजन?
शासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री इंदौर में, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में तथा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ल रीवा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में कैलाश विजयवर्गीय धार, राकेश सिंह जबलपुर, विश्वास कैलाश सारंग भोपाल, तुलसीराम सिलावट देवास, कुंवर विजय शाह खंडवा, प्रह्लाद सिंह पटेल नरसिंहपुर और करण सिंह वर्मा सीहोर में शस्त्र-पूजन करेंगे।
इसके अतिरिक्त मंत्रियों एवं राज्यमंत्रियों को सागर, दतिया, मंडला, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, भोपाल सहित प्रदेश के अन्य जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। जिन जिलों में मंत्री शामिल नहीं होंगे, वहां संबंधित जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के साथ नागरिकों से भी अपने घरों में परंपरानुसार शस्त्र-पूजन करने की अपील की गई है।
शिक्षा और परंपरा—दोनों पर शासन का जोर
उज्जैन में महाकालपुरम प्रकल्प का भूमिपूजन और दशहरे पर प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन की घोषणा, दोनों कार्यक्रम राज्य सरकार के शिक्षा, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़े दृष्टिकोण को सामने रखते हैं। एक ओर नए शैक्षणिक प्रकल्प के माध्यम से शिक्षा के विकल्प बढ़ाने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र-पूजन को परंपरा और सुरक्षा के संकल्प से जोड़ा गया है।
महाकालपुरम प्रकल्प की वास्तविक प्रगति का आकलन उसके निर्माण, शैक्षणिक सुविधाओं, प्रवेश व्यवस्था और विद्यार्थियों को मिलने वाली शिक्षा के आधार पर किया जा सकेगा। इसी प्रकार शस्त्र-पूजन कार्यक्रमों का आयोजन राज्य शासन की घोषित योजना के अनुसार संबंधित जिलों में किया जाएगा।
SDNA निष्कर्ष: उज्जैन का नया शैक्षणिक प्रकल्प और प्रदेश में दशहरा शस्त्र-पूजन कार्यक्रम दो अलग-अलग पहल हैं। इनके परिणामों का मूल्यांकन घोषणाओं के साथ-साथ जमीनी क्रियान्वयन और नागरिकों को मिलने वाले लाभ के आधार पर करना महत्वपूर्ण होगा।
— SDNA | सच के पीछे की खबर
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