Friday, October 23

मंगलवेढ़ा में 15 हजार हेक्टेयर में बुवाई का संकट! विधायक समाधान आवताडे की 17 मांगें, फल बागानों के लिए 1.25 लाख रुपये के पैकेज की मांग

केंद्र सरकार का अंतरमंत्रालयी दल सूखाग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए मंगलवेढ़ा पहुंचा था। इस दौरान विधायक समाधान आवताडे ने क्षेत्र में बारिश की कमी से उत्पन्न कृषि संकट, फसलों को हुए नुकसान और किसानों की समस्याओं से दल को अवगत कराया।

मंगलवेढ़ा तालुका में इस वर्ष बारिश की कमी के कारण खेती-किसानी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। अनुमान है कि बारिश नहीं होने के कारण लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाएगी। कई किसानों को बुवाई का अवसर ही नहीं मिला, जबकि जहां फसलें खड़ी हैं, वहां भी पानी के अभाव में फसलें सूखने लगी हैं। गन्ने, अनार और अन्य फल बागानों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।

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इस पृष्ठभूमि में विधायक समाधान आवताडे ने केंद्रीय दल के अधिकारियों और सोलापुर के जिलाधिकारी के साथ आंधलगांव, लेंडवे चिंचाळे तथा गोणेवाड़ी गांवों के खेतों का दौरा किया। उन्होंने बारिश की कमी के कारण सूख रही फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की।

विधायक आवताडे ने कहा कि सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रत्येक प्रभावित किसान को राहत मिलनी चाहिए। कोई भी किसान तकनीकी या दस्तावेजी शर्तों के कारण सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए।

  1. सभी प्रभावित किसानों को नुकसान भरपाई: प्रत्येक खेत का पंचनामा कर वास्तविक नुकसान के आधार पर सभी पात्र किसानों को मुआवजा दिया जाए। जिन खेतों में बुवाई नहीं हुई, उन्हें भी सहायता: बारिश के अभाव में बुवाई नहीं कर पाने वाले किसानों को भी नुकसान भरपाई का लाभ दिया जाए।
  2. फल बागानों के लिए विशेष पैकेज: अनार सहित अन्य फल बागानों को हुए नुकसान के लिए प्रति हेक्टेयर कम से कम 1 लाख 25 हजार रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए।
  3. ई-फसल निरीक्षण की अनिवार्यता में राहत: ई-फसल निरीक्षण (ई-पीक पाहणी) की अनिवार्यता में छूट दी जाए। सातबारा भूमि रिकॉर्ड, स्वघोषणा पत्र और प्रत्यक्ष क्षेत्र सत्यापन के आधार पर सहायता तय की जाए।
  4. पानी के टैंकरों पर हुए खर्च की भरपाई: फसलों को बचाने के लिए निजी टैंकरों से पानी खरीदने पर किए गए खर्च और कृषि आय में हुई कमी को ध्यान में रखकर मुआवजा दिया जाए।

6.कर्ज वसूली पर रोक: सूखाग्रस्त किसानों से कर्ज वसूली रोकी जाए, फसल ऋण का पुनर्गठन किया जाए और कर्जमाफी संबंधी निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

  1. पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए: चारे की कमी दूर करने के लिए तत्काल चारा डिपो अथवा चारा शिविर शुरू किए जाएं।
  2. बिजली कनेक्शन न काटे जाएं: सूखे की स्थिति में कृषि और घरेलू बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई नहीं की जाए।
  3. विद्यार्थियों की फीस में छूट: सूखाग्रस्त किसान परिवारों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक शुल्क में राहत दी जाए।
  4. क्षेत्रीय जलापूर्ति योजनाओं को राहत: भोसे एवं 40 गांव, कासेगांव और आंधलगांव क्षेत्रीय जलापूर्ति योजनाओं के बकाया बिजली बिल तथा पानी के बिल माफ किए जाएं। सूखा समाप्त होने तक मुफ्त बिजली और पानी उपलब्ध कराने पर निर्णय लिया जाए।
  5. तालुका स्तर पर सूखा राहत केंद्र: किसानों और नागरिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के लिए स्वतंत्र सूखा राहत केंद्र स्थापित किया जाए।
  6. रोजगार गारंटी के काम शुरू किए जाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार गारंटी योजनाओं के कार्य शुरू कर मजदूरों के पलायन को रोका जाए।
  7. टैंकरों से पेयजल आपूर्ति : दूरदराज की बस्तियों और पानी की कमी वाले गांवों में नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
  8. कृष्णा-माण-भीमा नदी जोड़ परियोजना को प्राथमिकता : नदी जोड़ परियोजना को गति दी जाए तथा अतिरिक्त पानी मंगलवेढ़ा क्षेत्र की ओर मोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
  9. आधुनिक स्वचालित बैराज का निर्माण: भीमा और माण नदियों पर पुराने कोल्हापुर पद्धति के बांधों के स्थान पर आधुनिक स्वचालित बैराज बनाने के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाए।
  10. दिवाली से पहले सूखा अनुदान: पात्र सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले अनुदान वितरित कर आर्थिक राहत दी जाए।
  11. केंद्रीय दल की रिपोर्ट में सभी मांगें शामिल हों: केंद्रीय दल अपनी रिपोर्ट में सभी 17 मांगों को शामिल करे और सूखाग्रस्त किसानों को व्यापक सहायता दिलाने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार से ठोस सिफारिशें करे।
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किसानों को तत्काल राहत देने की मांग

सूखे के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। आगामी रबी सीजन की तैयारी करना भी कई किसानों के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में सहायता देने की प्रक्रिया में अनावश्यक तकनीकी अड़चनें नहीं होनी चाहिए और वास्तविक नुकसान के आधार पर राहत निर्धारित की जानी चाहिए, यह मांग विधायक समाधान आवताडे ने रखी।

उन्होंने केंद्रीय दल से आग्रह किया कि क्षेत्र के किसानों की समस्याओं और खेतों में दिखाई दे रही स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपनी रिपोर्ट में सभी मांगों को प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से दिवाली से पहले अनुदान मिलने से किसान परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है।

इस दौरान श्री अफसर खान,सुमित शर्मा,जिला कृषि अधिकारी श्री भोसले,उपजिलाधिकारी अभिजीत पाटील,प्रांताधिकारी श्री माळी, तहसीलदार मदन जाधव, तालुका कृषि अधिकारी श्रीमती मिसाळ, पुलिस निरीक्षक बोरिगिड्डे, खंड विकास अधिकारी श्रीमती शेख, सभापति दीपाली ताड, उपसभापति अर्जुन मल्हाळे, उपनगराध्यक्ष श्री भगत, जिला परिषद सदस्य प्रदीप खांडेकर, रमेश भांजे,श्रीमती करुणाताई शिवशरण, पंचायत समिति सदस्य विनायक यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अब केंद्रीय दल की रिपोर्ट में इन मांगों को कितना महत्व मिलता है और सरकार सूखाग्रस्त किसानों के लिए क्या निर्णय लेती है, इस पर मंगलवेढ़ा तालुका के किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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