

22 वर्ष पुरानी साहित्यिक संस्था में नई कार्यकारिणी गठित; वरिष्ठ साहित्यकारों को संरक्षण और परामर्श की भूमिका
उज्जैन | SDNA
उज्जैन की साहित्यिक गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय ‘सरल काव्यांजलि’ को अब नई कार्यकारिणी और नया नेतृत्व मिला है। करीब 22 वर्ष पुरानी साहित्यिक संस्था की नई कार्यकारिणी में श्री प्रदीप सरल को अध्यक्ष मनोनीत किया गया है, जबकि मानसिंह शरद को सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संस्था के पुनर्गठन को साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संस्था की ओर से जानकारी देते हुए मुक्तेश मनावत ने बताया कि निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. संजय नागर ने अध्यक्ष पद के लिए प्रदीप सरल के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका अनुमोदन संतोष सुपेकर ने किया। इसके बाद नवनियुक्त अध्यक्ष प्रदीप सरल ने नई कार्यकारिणी की घोषणा की।
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नई टीम में अनुभव और नई पीढ़ी का संतुलन
नई कार्यकारिणी में संस्था ने अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े सदस्यों को शामिल किया है। मानसिंह शरद सचिव, संतोष सुपेकर महासचिव, राजेश कुशवाह, अनिलसिंह चंदेल, डॉ. पुष्पा चौरसिया, डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा और गिरिजादेवी ठाकुर को संरक्षक बनाया गया है।
वहीं डॉ. संजय नागर, राजेन्द्र देवधरे ‘दर्पण’, श्रीमती माया बदेका, सुगनचंद्र जैन और डॉ. वंदना गुप्ता को परामर्शदाता की भूमिका दी गई है।
कार्यकारिणी में डॉ. रफीक नागोरी उपाध्यक्ष, महेन्द्र सिंह भदौरिया सह सचिव, डॉ. नेत्रा रावणकर प्रचार सचिव और हर्ष सैनी कोषाध्यक्ष होंगे।
विशेष कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आशागंगा शिरढ़ोणकर, शीला व्यास, गोपालकृष्ण निगम, डॉ. रश्मि मोयदे, तरुण उपाध्याय, अमृता उषारिया और अमित जैन को शामिल किया गया है।
नेतृत्व बदला, लेकिन संस्था की साहित्यिक पहचान बरकरार
नई कार्यकारिणी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेतृत्व परिवर्तन के साथ संस्था ने अपने पुराने अनुभव को भी साथ रखा है। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. संजय नागर को परामर्शदाता की भूमिका दिया जाना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि नेतृत्व का हस्तांतरण संस्था की पूर्व परंपराओं से पूरी तरह अलग होकर नहीं, बल्कि उनके अनुभव को साथ लेकर किया जा रहा है।
संरक्षकों और परामर्शदाताओं के रूप में वरिष्ठ सदस्यों की मौजूदगी नई टीम को मार्गदर्शन देने में उपयोगी हो सकती है, जबकि अध्यक्ष और सचिव सहित नई कार्यकारिणी के सामने संस्था की गतिविधियों को अधिक सक्रिय और व्यापक बनाने की जिम्मेदारी होगी।
अब अगली चुनौती साहित्य को नई पीढ़ी से जोड़ने की
22 वर्ष का सफर किसी भी साहित्यिक संस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि वर्तमान समय में साहित्यिक संस्थाओं के सामने चुनौती केवल कवि सम्मेलन या साहित्यिक गोष्ठियों के आयोजन तक सीमित नहीं है। डिजिटल माध्यम, सोशल मीडिया, युवा लेखन, नए रचनाकारों को मंच और साहित्य को आम पाठक तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
नई कार्यकारिणी के सामने आने वाले समय में युवा कवियों और लेखकों को मंच देने, नियमित साहित्यिक आयोजन करने, वरिष्ठ और नवोदित रचनाकारों के बीच संवाद बढ़ाने तथा साहित्यिक गतिविधियों को डिजिटल माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
खबर के पीछे का अर्थ : नई कार्यकारिणी सिर्फ पदों का बदलाव नहीं
‘सरल काव्यांजलि’ में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल अध्यक्ष और सचिव बदलने की औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 22 वर्षों तक किसी साहित्यिक संस्था का सक्रिय बने रहना अपने आप में उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक उपयोगिता को दर्शाता है।
अब नई टीम के सामने सबसे बड़ी कसौटी यह होगी कि वह संस्था की पुरानी साहित्यिक पहचान को बनाए रखते हुए उसे बदलते समय और नई पीढ़ी की रुचियों के अनुरूप कितनी नई ऊर्जा देती है।
वरिष्ठ साहित्यकारों का अनुभव यदि युवा रचनाकारों की नई सोच के साथ जुड़ता है, तो संस्था केवल कार्यक्रम आयोजित करने वाली इकाई न रहकर उज्जैन के साहित्यिक संवाद का स्थायी मंच बन सकती है।
विशेष रूप से युवा प्रतिभाओं को अवसर, नियमित साहित्यिक संवाद, स्थानीय लेखकों की पहचान और साहित्य को डिजिटल मंचों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया तो नई कार्यकारिणी का यह कार्यकाल संस्था के अगले चरण की नींव रख सकता है।
(SDNA)
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