विज्ञापन, अखबार और जवाबदेही का सवाल
पैसे के बदले प्रकाशित सामग्री जब समाचार जैसी दिखने लगे, तब सवाल केवल विज्ञापन का नहीं, मीडिया की विश्वसनीयता का बन जाता है
नई दिल्ली। (सद्वार्ता) अखबार के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित हर सामग्री पाठक के मन में एक विशेष विश्वसनीयता पैदा करती है। यही वजह है कि जब किसी विवादित व्यक्ति या संस्था के पक्ष में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित होता है और उसका प्रस्तुतीकरण समाचार या तथ्यात्मक पड़ताल जैसा दिखाई देता है, तब सवाल केवल विज्ञापन और भुगतान तक सीमित नहीं रहता। मामला मीडिया की विश्वसनीयता, संपादकीय विवेक और सामाजिक जवाबदेही से भी जुड़ जाता है।
12 सितंबर 2026 को ‘द हिन्दू’ के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में एक डेरा से संबंधित पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। इसी तरह का विज्ञापन ‘दैनिक भास्कर’ के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित होने की रिपोर्ट भी सामने आई। विज्ञापन का शीर्षक था...


